Raj Bhasha

 Raj Bhasha

केन्द्रीय विद्यालय ओ.एन.जी.सी. शिवसागर, असम

स्थान- विद्यालय सभागार

आज दिनांक 12/05/2012 को केन्द्रीय विद्यालय ओ.एन.जी.सी. शिवसागर, असम के सभागार में श्रीमान अजय पंत , माननीय उपायुक्त महोदय, केन्द्रीय विद्यालय संगठन, तिनसुकिया संभाग की अध्यक्षता में विद्यालय परिवार के सदस्यगणों को संम्बोधित किया गया एवं निम्न विषयों पर सुझाव प्रदान करते हुए मार्गदर्शन किया गया।

1.  केन्द्रीय विद्यालय संगठन  शिक्षा के क्षेत्र में , उपलब्धियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थान हैं अत: इसकी गरिमा एवं महत्व को बनाए रखना ओर बुलन्दियों  के शिखर तक ले जाने में सम्पूर्ण समर्पण एवं त्याग की आवश्यकता हैं ।

2.  आदर्श की परिभाषाएँ किसी साँचे में तैयार नहीं की जाती अपितु इस हेतु व्यावहारिक रूप में प्रयास किए जाने आवश्यक हैं ।

3.   विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक मार्गनिर्देशन एवं स्वाभाविक समस्या समाधान हेतु  प्राथमिक विभाग से तीन महिला शिक्षक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विभाग से क्रमश: तीन महिला एवं तीन पुरुष शिक्षक निर्देशित किए जाएँ ।

4.  शिक्षकों की वेषभूषा आदर्श की परिभाषा पर खरी हो ऐसी अपेक्षा जायज है।

5.   विद्यार्थी पुष्प की माफिक कोमल होते हैं उन्हें शारीरिक रूप से दंडित करना संवैधानिक रूप से तो अपराध है ही साथ ही यह उनकी कोमल भावनाओं को भी आघात पहुंचाता है अत: किसी भी प्रकार से उन्हें प्रताड़ना नहीं पहुँचें इस का विशेष ध्यान रखा जाए ।

6.  भाषा शिक्षक विद्यार्थियों के सृजन की प्रतिभा को विभिन्न माध्यमों से निखारने का प्रयास करेंगें ।

7.  शिक्षक स्वाभाविक रूप से ब्रह्मा की तरह विद्यार्थियों में वैचारिक सृजन करें, विष्णु की तरह प्रेम एवं सह्र्द्यता से वैचारिक लालन- पालन करे एवं महेश की तरह उनके  नकारात्मक विचारों को नष्ट करें ।

8.   विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम गुणात्मक एवं सृजनात्मक होने की पूर्ण अपेक्षा शिक्षकों से वांछित एवं स्वाभाविक है शिक्षक विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक स्तर को पहचान कर उनके संवेदनात्मक मूल्यों में वृद्धि करते हुए उसे सक्षम बनाने का प्रयास करें ।

9.  विद्यालय परिसर स्वच्छता और सुरक्षा कि दृष्टि से और अधिक उन्नत बनाया जाए ।

10. कॅरियर,दिशा- निर्देशन की प्रक्रिया को वांछित गति प्रदान की जाए ।

11. उपायुक्त महोदय ने कक्षा XII के सभी संकायों के विद्यार्थियों से व्यक्तिगत रूप से वार्तालाप कर उनकी समस्याएँ जानी एवं प्रेरणा के साथ स्वाभाविक समाधान प्रदान करते हुए उपर्युक्त संबंध में शिक्षकों को भी निर्देशित किया।

संक्षिप्त रिपोर्ट : राजभाषा विभाग

सत्र 2012

 

(I)       विध्यार्थियों को नियमित गृहकार्य दिया गया, गृहकार्य की नियमित जांच के  आधार पर अंक प्रदान किए गए ।

(II)      विध्यार्थियों को प्रोजेक्ट वर्क दिया गया और मूल्यांकन के आधार पर उचित अंक प्रदान किए गए ।

(III)     फार्मेटिव 4 के अंतर्गत वाद-विवाद  प्रतियोगिताएं आयोजित कर प्रदर्शन के आधार पर अंक प्रदान किए गए ।

(IV)    विध्यार्थियों के भाषिक उच्चारण को सुनियोजित तरीके से सुधारने के प्रयत्नों के साथ  उच्चारण का मूल्यांकन करते हुए अंक प्रदान किए गए ।

(V)     कव्यापाठ  प्रतियोगिताएं आयोजित कर प्रदर्शन के आधार पर अंक प्रदान किए गए।

(VI)    वर्ग पहेली एवं  भाषा प्रतियोगिताएं आयोजित कर प्रदर्शन के आधार पर अंक प्रदान किए गए ।

(VII)   विध्यार्थियों के व्यावहारिक ओर संवेदनात्मक मूल्यांकन के आधार पर विभिन्न स्तरों में विभाजित करते हुए मूल्यांकन किया गया ।

(VIII)  उच्चारण शुद्धि हेतु व्यावहारिक प्रयास करते हुए  च,, छ की उच्चारण शुद्धि हेतु विशेष प्रयास किए जाने प्रस्तावित है ।

 

केन्द्रीय विधालय ओ.एन.जी. सी. शिवसागर मे -

(IX)    हिन्दी पत्राचार एवं रुटीन टाईप प्रयोग राजभाषा विभाग के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है!

(X)     २ हिन्दी कार्यशाला आयोजन आप द्वारा प्रद्त निर्देशों के तहत किया जाना निश्चित किया गया है!

(XI)    ३  लक्ष्य के अनुसार हिन्दी पत्राचार का प्रतिशत प्राप्त करने का संकल्प भी पुरा किया जाना तय हुआ है!

(XII)   ४ पुस्तकालय हेतु हिन्दी भाषा की पुस्तकों (पुस्तकालय बजट का ५०% ) सत्र २०११-०९-१२, के क्रय हेतु प्रकाशक को आदेश दिया जा चुका है!

(XIII)  ५ माननीय संसदीय राजभाषा समिति द्वारा प्रदत निर्देशों के कड़ाई से अनुपालन की अनुशंसा ध्वनिमत से पारित की गई है।

 

 

पुस्तक-समीक्षा

एक जगह साथ : सहज काव्य-संग्रह

 

 

'एक जगह साथ' (कविता संग्रह) में कवि ने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी की जद्दोजहद, अतीत और वर्तमान, मानव समाज में हो रहे परिवर्तन, पारिवारिक सामंजस्‍य की कमी, भ्रष्‍टाचार, बाजारवाद एवं नारी की दुर्दशा को बड़े ही मार्मिक एवं सूझबूझ भरे अंदाज में प्रस्‍तुत किया है। यह निश्चित तौर पर पठनीय है।

मेरे हिस्से का आकाश : आकर्षक काव्य-संग्रह

 

 

कवयित्री ज्योति जैन के सद्य: प्रकाशित काव्य-संग्रह 'मेरे हिस्से का आकाश' ने साहित्य-संसार में सुनहरी संभावनाओं के साथ दस्तक दी है। इस काव्य-संग्रह में 101 विविध रंगी कविताएं संयोजित की गई है। संग्रह की भूमिका वरिष्ठ कवि अशोक चक्रधर ने लिखी है। प्रेम, स्त्री शक्ति, मां, रिश्ते, राष्ट्र, प्रकृति, बेटियां, जीवनसाथी जैसे सुकोमल-गंभीर विषयों पर कवयित्री ने खूबसूरत भावाभिव्यक्तियां दी हैं। संग्रह का सबसे आकर्षक पक्ष है प्रथम खंड 'कोमल अहसास प्रेम का' और अंतिम खंड 'ज्योति हूं मैं'

     

 

 

 

 

 

 

 

 

मध्यमवर्गीय अनुभवों का दस्तावेज

 

सूर्यकांत नागर की पुस्तक 'श्रेष्ठ कहानियां' उनकी 17 चुनिंदा कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों में हमें समाज के विभिन्न वर्गों के उजले और काले चेहरे हूबहू नजर आते हैं। उनकी कहानियां मध्यमवर्गीय व्यक्ति के जीवन के अनुभवों का दस्तावेज है। लेखक ने बिना किसी लाग-लपेट के कहानियों के पात्रों के माध्यम से उनके मन की वास्तविक सोच को सीधे-सीधे उजागर किया है।

महाराजा –

  मध्यकालीन राजाओं एवं विशेषत: राजस्थान के महाराजाओं के चरित्र चित्रण एवं उनके द्वारा की गई अय्याशियों का चित्रण दीवान जर्मनी दास के द्वारा तथ्यों के आधार पर किया गया है वास्तविक रूप में भारत को गुलाम बनाने की दास्तां इस उपन्यास को पढ़ कर समझ में आती है